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सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप के ऑनलाइन ध्यान केंद्र में
आपका स्वागत है

“सामूहिक ध्यान वह दुर्ग है जो नये आध्यात्मिक प्रत्याशियों एवं अभ्यस्त साधकों दोनों की रक्षा करता है। समूह के अदृश्य चुंबकीय स्पंदन के विनिमय के नियम द्वारा एक साथ ध्यान करने से प्रत्येक साधक आत्म-साक्षात्कार के अपने लक्ष्य में सहयोग पाता है।”

—परमहंस योगानन्द

परमहंस योगानंद-

एसआरएफ़/वाईएसएस के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद जी ने 2019 दीक्षांत समारोह में एसआरएफ़ ऑनलाइन ध्यान केंद्र का परिचय दिया

स्वागत

हमारे पूजनीय गुरु और संस्थापक, परमहंस योगानंद जी के नाम में, मैं सानन्द आप सबका सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप ऑनलाइन ध्यान केंद्र में स्वागत करता हूँ। सभी एसआरएफ़ ध्यान केंद्रों और मण्डलियों की तरह, यह ऑनलाइन सेवा भी हमारे अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय में स्थित केंद्र विभाग के संन्यासियों की देखरेख में संचालित की जाती है, और गृहस्थ स्वयंसेवकों के एक प्रबंध परिषद के सहयोग द्वारा चलायी जाती है। (विस्तार में पढ़ें)

इस ऑनलाइन केंद्र के माध्यम से, हम आपके साथ, दुनिया भर में व्याप्त एसआरएफ़ के सदस्यों और साथियों की संगत में, सामूहिक ध्यान और परमहंसजी की शिक्षाओं का मिलकर अध्ययन करने के आशीर्वादों को साझा करना चाहते हैं।

दिव्य मैत्री में,

स्वामी चिदानंद गिरि

अध्यक्ष, सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप/योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया

सूचनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त करने के लिए सदस्यता लें

ऑनलाइन ध्यान केंद्र का उद्देश्य

सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप के किसी मंदिर, केंद्र या ध्यान समूह में शारीरिक रूप से भाग लेने के कई मूर्त और अमूर्त लाभ हैं, और हम सभी को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं यदि उनके लिए यह संभव है। परंतु, पूरे विश्व में व्याप्त हमारे आध्यात्मिक परिवार के कई सदस्य सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप समूहों और केंद्रों से या तो दूर रहते हैं या फिर वहाँ जाने में अन्य कारणों से असमर्थ हैं। अब सभी भक्तों को, चाहे वे कहीं भी रहते हों या उनकी कैसी भी परिस्थितियाँ क्यों न हों, अन्य सत्यान्वेषियों के साथ आध्यात्मिक सत्संग के उद्देश्य से एकत्र होकर सामूहिक ध्यान और आध्यात्मिक अध्ययन करने का एक अवसर उपलब्ध है।

ऑनलाइन सामूहिक ध्यान-सत्र

परमहंस योगानंद जी ने आजीवन यही सिखाया कि अपनी साधना को गहरा करने के लिए सामूहिक ध्यान अमूल्य है। अब आपके पास सामूहिक ध्यान में शामिल होने का अवसर होगा, चाहे आप कहीं भी रहते हों या आपकी परिस्थितियाँ कैसी भी क्यों न हो।
ऑनलाइन सामूहिक ध्यान द्वारा आप दुनिया भर में हो रहे ध्यान-सत्रों में परमहंस योगानंद के अनुयायियों के साथ ध्यान में शामिल हो सकेंगे। आप दुनिया में कहीं भी हों, आपके समय और सुविधा के अनुकूल कोई-न-कोई ध्यान-सत्र होने की काफ़ी संभावना है।
भविष्य में, कई तरह के ध्यान-सत्रों को शामिल करने की योजना है: लघु ध्यान-सत्र; दीर्घ ध्यान-सत्र; ऐसे ध्यान-सत्र जिसमें प्रतिज्ञापन का अभ्यास भी होगा; कीर्तन के साथ ध्यान-सत्र, आदि। इसके अलावा हम यथाशीघ्र कई अन्य भाषाओं में भी ध्यान-सत्र आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।

ऑनलाइन अध्ययन समूह

परमहंस योगानन्द जी की शिक्षाएं अनेकानेक प्रेरणात्मक और सार्वभौमिक आध्यात्मिक सत्यों पर गहनतम ज्ञान प्रस्तुत करती हैं।
जिस तरह सामूहिक ध्यान समूह के प्रत्येक सदस्य के प्रयास को बलवत बनाता है, उसी तरह समूह में एकत्र होकर गुरु की शिक्षाओं का अध्ययन करने से प्रत्येक सदस्य को इन कालातीत सच्चाइयों पर अपना ध्यान और एकाग्रता गहरा करने में मदद मिलती है।
ऑनलाइन अध्ययन समूह व्यक्तियों को इन विषयों पर सामूहिक अध्ययन करने का अवसर प्रदान करते हैं : सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप/योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया पाठ, श्रीमद् भगवद्गीता पर हमारे गुरु का भाष्य (ईश्वर-अर्जुन संवाद) और बाइबल में जीसस के उपदेशों पर गुरुदेव की व्याख्या (The Second Coming of Christ: The Resurrection of the Christ Within You)।.

"ऑनलाइन ध्यान-सत्र और अध्ययन समूह में गुरुदेव की उपस्थिती का आभास अद्भुत ढंग से स्पष्ट था - अकेले ध्यान करने या अध्ययन करने की तुलना में कहीं अधिक।"

ध्यान-सत्रों की समय-सारणी देखें

ध्यान-सत्र में
कैसे भाग लें

हमारे साथ साझा किए गए अनुभव

“इससे हमें वास्तव में सामूहिक ध्यान में भाग लेने जैसा ही अनुभव मिला। यह अद्भुत था। यह देखकर मुझे आश्चर्य हुआ कि किस प्रकार यह बिल्कुल वास्तविक ध्यान-सत्र के जैसा ही था!”

“ऑनलाइन ध्यान-सत्र में शामिल होने का मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा। सचमुच ऐसा महसूस होता है कि हम एक समूह का हिस्सा हैं!”

“जल्दी उठ कर भक्तों के साथ बैठकर ध्यान करना और लाइव कीर्तन सुनना बहुत ही अच्छा लगा!”

“मुझे ध्यान-सत्र में बहुत आनंद आया और मैं यह प्रतिदिन करना चाहूँगा। समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला और यह अत्यंत मधुर अनूभव था!”

“यह अद्भुत है कि यह बिल्कुल वास्तविक सामूहिक ध्यान में भाग लेने के समान ही प्रतीत होता है।”

“इस में मुझे बहुत आनन्द आया। मैं सामूहिक ध्यान की ताकत और संसर्ग को महसूस कर पाया।”